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कहते हैं बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¤—वान का रूप होते हैं। उनके अंदर जितनी मासूमियत à¤à¤°à¥€ होती है, उतनी ही चंचलता à¤à¥€ होती है। इसलिठवो कई तरह की बदमाशी à¤à¥€ करते हैं। कई बार तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ चीजों के सेवन की आदत लग जाती है, जो उनके लिठनà¥à¤•सानदायक हो सकती है। उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ आदतों में से à¤à¤• है- मिटà¥à¤Ÿà¥€ का सेवन। मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ का हमारा यह लेख इसी विषय पर आधारित है। यहां हम बताà¤à¤‚गे कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाना कितना सामनà¥à¤¯ है। इसके अलावा यहां हम इसके कारणों और इससे बचाव के तरीकों को à¤à¥€ बताà¤à¤‚गे।
तो चलिठसबसे पहले जान लेते हैं, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की समसà¥à¤¯à¤¾ कितनी आम है।
कà¥à¤¯à¤¾ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाना आम समसà¥à¤¯à¤¾ है?
हां, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने (पिका) की समसà¥à¤¯à¤¾ आम है। इस बात की जानकारी à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤¬à¥€à¤†à¤ˆ की वेबसाइट पर पबà¥à¤²à¤¿à¤¶ à¤à¤• रिसरà¥à¤š से मिलती है। इस रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पिका की समसà¥à¤¯à¤¾ यानी गैर-खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ (जैसे:- ईंट, चाक, साबà¥à¤¨, कागज, मिटà¥à¤Ÿà¥€) का सेवन काफी सामानà¥à¤¯ है। यह समसà¥à¤¯à¤¾ मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से 2 से 7 साल की उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में देखने को मिल सकती है (1)। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनके बारे में हम लेख में आगे विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताà¤à¤‚गे।
अब हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में जानेंगे।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के लकà¥à¤·à¤£
जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पिका की समसà¥à¤¯à¤¾ होती है, वो निमà¥à¤®à¤²à¤¿à¤–ित चीजों का सेवन कर सकते हैं। इसे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के तौर पर देखा जा सकता है (2):
पशॠका मल
चिकनी मिटà¥à¤Ÿà¥€
गंदगी
हेयरबॉल
बरà¥à¤«
रंग
रेत
वहीं सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ गंà¤à¥€à¤° होने पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ देखने को मिल सकते हैं, जो इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (2):
पेट में दरà¥à¤¦ होना।
मतली होना।
पेट या आंत में रà¥à¤•ावट के कारण सूजन होना।
थकान लगना।
वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ (जैसे :- बचà¥à¤šà¥‡ का चिड़चिड़ा होना)।
सà¥à¤•ूल की समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ (जैसे अगर बचà¥à¤šà¤¾ सà¥à¤•ूल जाता है तो पढ़ाई में धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ न लगना)।
बचà¥à¤šà¥‡ को सही पोषण न मिल पाना
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के कारण
बचà¥à¤šà¥‡ मà¥à¤‚ह में मिटà¥à¤Ÿà¥€ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ डालते हैं, फिलहाल इस बात का अà¤à¥€ à¤à¥€ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ कारण नहीं चल पाया है। फिर à¤à¥€ कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इसके कारण के रूप में देखा जाता है। यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हो सकती हैं (3):
विकास संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ – बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के कारणों में विकास संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती है। जैसे ऑटिजà¥à¤® की समसà¥à¤¯à¤¾ या बौदà¥à¤§à¤¿à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ की कमी। दरअसल, ऑटिजà¥à¤® à¤à¤• विकास संबंधी विकार है, जो सीखने, समà¤à¤¨à¥‡ और बातचीत करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बाधित करता है। à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने का à¤à¤• कारण इसे à¤à¥€ माना जा सकता है।
मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚– कà¤à¥€-कà¤à¥€ मानसिक सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के कारण à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ मिटà¥à¤Ÿà¥€ खा सकते हैं। इन समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं में ऑबà¥à¤¸à¥‡à¤¸à¤¿à¤µ कंपलà¥à¤¸à¤¿à¤µ डिसऑरà¥à¤¡à¤° (अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• विचारों के कारण à¤à¤• ही चीज को बार-बार दोहराना) या सà¥à¤•िजोफà¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ (वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°, सोचने और महसूस करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ में कमी)शामिल हैं।
कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ या à¤à¥‚ख– कà¤à¥€-कà¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ आयरन या जिंक जैसे पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी के कारण à¤à¥€ मिटà¥à¤Ÿà¥€ का सेवन कर सकते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ की समसà¥à¤¯à¤¾ को à¤à¥€ इसके पीछे का à¤à¤• कारण माना जा सकता है। वहीं इसके विपरीत à¤à¥‹à¤œà¤¨ न मिलने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बचà¥à¤šà¥‡ पेट à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठमिटà¥à¤Ÿà¥€ जैसी चीजों का सेवन कर सकते हैं।
तनाव के कारण– मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत के पीछे का à¤à¤• कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में तनाव को à¤à¥€ माना जा सकता है। दरअसल, अकà¥à¤¸à¤° गरीबी में रहने वाले बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत देखी गई है, जो अनà¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के मà¥à¤•ाबले अधिक तनाव में रहते हैं।
आगे अब हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के साइड इफेकà¥à¤Ÿ और उससे होने वाली बीमारियों के बारे में बताà¤à¤‚गे।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के नà¥à¤•सान व होने वाली बीमारियां
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाना उनके लिठनà¥à¤•सानदायक हो सकता है। इस वजह से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कई पà¥à¤°à¤•ार की सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं। यहां हम उनà¥à¤¹à¥€ परेशानियों का जिकà¥à¤° कर रहे हैं (3) (4) :
पेट में कीड़े – मिटà¥à¤Ÿà¥€ में कई पà¥à¤°à¤•ार के परजीवी रहते हैं। अगर बचà¥à¤šà¥‡ मिटà¥à¤Ÿà¥€ का सेवन करते हैं, तो उनके मà¥à¤‚ह के जरिठये परजीवी उनके पेट तक पहà¥à¤‚च सकते हैं। इस कारण मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने वाले बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पेट में कीड़े होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बनी रहती है।
कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£â€“ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के कारण होने वाली बिमारियों में आयरन की कमी से होने वाली à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ शामिल है। दरअसल, जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की इचà¥à¤›à¤¾ होती है, उनके शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ हो सकते हैं।
मà¥à¤‚ह या दांतों में समसà¥à¤¯à¤¾ – मिटà¥à¤Ÿà¥€ का सेवन करने के कारण मà¥à¤‚ह के साथ-साथ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के दांतों को à¤à¥€ नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚च सकता है। यही नहीं, इस कारण उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मसूड़ों की समसà¥à¤¯à¤¾ और टूथ इनेमल (दांतों की ऊपरी परत) के à¤à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ हो सकती है।
आंतो में संकà¥à¤°à¤®à¤£ – मिटà¥à¤Ÿà¥€ के सेवन से आंतो में à¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ का खतरा हो सकता है। दरअसल, मिटà¥à¤Ÿà¥€ में कई तरह के परजीवी या कीड़े मौजूद हो सकते है। यह कीड़े मà¥à¤‚ह के जरीठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पेट में जा सकते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में कीड़ों के कारण आंतों में संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने का जोखिम à¤à¥€ बॠजाता है।
आंतो में रà¥à¤•ावट – मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने से आंतों में रà¥à¤•ावट à¤à¥€ हो सकती है। दरअसल, मनà¥à¤·à¥à¤¯ का पाचन तंतà¥à¤° मिटà¥à¤Ÿà¥€ को नहीं पचा सकता है, जिससे वहीं फंस सकती है और इस कारण पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकती है।
विषाकà¥à¤¤à¤¤à¤¾â€“ मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में विषाकà¥à¤¤à¤¤à¤¾ होने की आशंका à¤à¥€ बनी रहती है। खासकर उन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में जो शहर में रहते हैं। कारण यह हैं कि शहरी मिटà¥à¤Ÿà¥€ में लेड यानी सीसा जैसे विषैले ततà¥à¤µ होने की आशंका अधिक रहती है। यह लेड जब मिटà¥à¤Ÿà¥€ के माधà¥à¤¯à¤® से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पेट में जाता है तो यह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में विषाकà¥à¤¤à¤¤à¤¾ का कारण बन सकता है।
लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में अब हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत को छà¥à¥œà¤¾à¤¨à¥‡ के कà¥à¤› उपाय बताने जा रहे हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने से कैसे बचाये?
यहां हम कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ उपाय बताने जा रहे हैं, जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत को छà¥à¥œà¤¾à¤¨à¥‡ में कारगर साबित हो सकते हैं। यह उपाय कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं (5) (1) (2) :
डॉकà¥à¤Ÿà¤° से सलाह लें – बचà¥à¤šà¥‡ में अगर मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत है, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥€ परामरà¥à¤¶ जरूर लें। à¤à¤¸à¤¾ इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि, डॉकà¥à¤Ÿà¤° सबसे पहले इस बात का पता लगाà¤à¤—ा कि बचà¥à¤šà¥‡ के शरीर में कौने से पोषक ततà¥à¤µ की कमी है, जिस वजह से वह मिटà¥à¤Ÿà¥€ का सेवन कर रहा है। जांच के माधà¥à¤¯à¤® से ही इस बात का पता लगाया जा सकता है कि बचà¥à¤šà¥‡ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत शरीर में आयरन या जिंक की कमी के कारण तो नहीं है। इसके लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° à¤à¤¨à¤¿à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ संबंधी टेसà¥à¤Ÿ की सलाह à¤à¥€ दे सकता है। अगर à¤à¤• बार मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने का कारण पता चल जाता है तो उसे ठीक कर मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत से बचाव किया जा सकता है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° पर नजर बनाठरखें – मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत से बचाव के लिठबचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की आदतों पर नजर बनाठरखें। यह पता लागाà¤à¤‚ कि किस समय में उसे मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने का मन करता है। à¤à¤• बार समय का पता चल जाà¤à¤—ा तो उस हिसाब से बचà¥à¤šà¥‡ को मिटà¥à¤Ÿà¥€ से दूर रखने में मदद मिल सकती है।
माइलà¥à¤¡ à¤à¤µà¤°à¥à¤œà¤¨ थेरेपी का उपयोग – जब à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‡ को मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की इचà¥à¤›à¤¾ हो रही हो तो माइलà¥à¤¡ à¤à¤µà¤°à¥à¤œà¤¨ थेरेपी का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करें । दरअसल, यह à¤à¤• मनोवैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट है। इसके माधà¥à¤¯à¤® से रोगी के धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ को à¤à¤Ÿà¤•ाने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में जिस समय बचà¥à¤šà¥‡ को मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने का मन हो रहा हो, उस समय उसे दूसरे कामों में उलà¤à¤¾à¤à¤‚। à¤à¤¸à¤¾ करने से उसका धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ मिटà¥à¤Ÿà¥€ की तरफ नहीं जाà¤à¤—ा।
पसंदीदा à¤à¥‹à¤œà¤¨ खिलाà¤à¤‚ – बचà¥à¤šà¥‡ मिटà¥à¤Ÿà¥€ न खाà¤à¤‚, इसके लिठउनके पसंदीदा à¤à¥‹à¤œà¤¨ की à¤à¥€ मदद ले सकते है। दरअसल, जब à¤à¥€ बचà¥à¤šà¤¾ मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की जिदà¥à¤¦ करे तो उसे उसका फेवरेट à¤à¥‹à¤œà¤¨ खिलाà¤à¤‚। इससे वह मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाना à¤à¥‚ल जाà¤à¤—ा और अपने मनचाहे à¤à¥‹à¤œà¤¨ को खà¥à¤¶à¥€ से खाà¤à¤—ा।
सामानà¥à¤¯ à¤à¥‹à¤œà¤¨ के लिठपà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ृत करें – जैसा कि हमने बताया कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत à¤à¤• मानसिक समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत छà¥à¥œà¤¾à¤¨à¥‡ के लिठपà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार की मदद ली जा सकती है। बचà¥à¤šà¤¾ जब à¤à¥€ सामानà¥à¤¯ à¤à¥‹à¤œà¤¨ खाठतो उसे इनाम दें। इससे धीरे-धीरे बचà¥à¤šà¥‡ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत दूर हो सकती है।
बचाव के बाद इस समसà¥à¤¯à¤¾ की दवा और मेडिकल टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट को à¤à¥€ जान लीजिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मिटà¥à¤Ÿà¥€ छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤¨à¥‡ की दवा व इलाज
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत को छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठकोई खास मेडिकल टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट नहीं है (6)। हालांकि, माता-पिता, डॉकà¥à¤Ÿà¤° के साथ मिलकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत को छà¥à¤¡à¤¼à¤¾ सकते हैं। इसके लिठइलाज के तौर पर निमà¥à¤¨ बातों को अपनाने का सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया जा सकता है (2) (3) (7)।
पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार लेने की सलाह दी जा सकती है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°, परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ और पारिवारिक शिकà¥à¤·à¤¾ देने संबंधी सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया जा सकता है।
अगर कोई बचà¥à¤šà¤¾ विकास संबंधी विकार जैसे बौदà¥à¤§à¤¿à¤• अकà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ से गà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¤ है, तो इसके लिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° कà¥à¤› विशेष दवाà¤à¤‚ लेने की सलाह दे सकते हैं।
इसके अलावा डाकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को आयरन और जिंक सपà¥à¤²à¤¿à¤®à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ à¤à¥€ दिठजा सकते हैं।
लेख के अंत में हम मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत को छà¥à¥œà¤¾à¤¨à¥‡ के लिठकà¥à¤› घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–े बता रहे हैं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत छà¥à¥œà¤¾à¤¨à¥‡ के घरेलू उपाय
यहां हम कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–े को बता रहे हैं, जिनकी मदद से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने से बचाने में मदद मिल सकती है। यह उपाय कà¥à¤› इस पà¥à¤°à¤•ार हैं :
1. केला और शहद
सामगà¥à¤°à¥€ :
दो पके हà¥à¤ केले
à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š शहद
उपयोग करने का तरीका :
सबसे पहले केले को अचà¥à¤›à¥‡ से मैश कर लें।
अब उसमें शहद डाल कर उसे अचà¥à¤›à¥‡ से मिला लें।
फिर इसका सेवन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को कराà¤à¤‚।
कैसे है फायदेमंद :
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत छà¥à¥œà¤¾à¤¨à¥‡ के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ केले और शहद का सेवन करा सकते हैं। बता दें कि केला फाइबर से समृदà¥à¤§ होता है (8)। वहीं à¤à¤• रिसरà¥à¤š के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• फाइबर का सेवन पेट को à¤à¤°à¤¾ रखता है (9)। इससे बचà¥à¤šà¥‡ को अधिक à¤à¥‚ख नहीं लगेगी और बचà¥à¤šà¥‡ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की ओर नहीं जाà¤à¤—ा। वहीं, शहद में à¤à¤‚टी बैकà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¤¿à¤¯à¤² पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ मौजूद होता है, जो हानिकारक बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से रकà¥à¤·à¤¾ करने में मदद कर सकता है (10)।
2. लौंग
सामगà¥à¤°à¥€ :
à¤à¤• चà¥à¤Ÿà¤•ी चमà¥à¤®à¤š पिसी हà¥à¤ˆ लौंग
आधा कप पानी
उपयोग करने का तरीका :
पीसी हà¥à¤ˆ लौंग को पानी में डालकर सबसे पहले उबाल लें।
अब à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š तैयार इस लौंग के पानी को बचà¥à¤šà¥‡ को दिन में à¤à¤• बार पिलाà¤à¤‚।
कैसे है फायदेमंद :
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत को रोकने के लिठलौंग का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² à¤à¥€ किया जा सकता है। दरअसल, लौंग नें तनाव को कम करने वाले गà¥à¤£ के साथ-साथ बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से बचाने वाले गà¥à¤£ à¤à¥€ मौजूद होते हैं (11) (12)। वहीं लेख में हम आपको पहले ही बता चà¥à¤•े हैं कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने का à¤à¤• कारण तनाव à¤à¥€ हो सकता है (3)। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि लौंग का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इस समसà¥à¤¯à¤¾ से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।
3. आजवाइन
सामगà¥à¤°à¥€ :
आधा चमà¥à¤®à¤š आजवाइन
उपयोग करने का तरीका :
आजवाइन का चà¥à¤°à¥à¤£ बना लें और उसे बचà¥à¤šà¥‡ को खिलाà¤à¤‚।
अगर चाहें तो बचà¥à¤šà¥‡ को आजवाइन का पानी à¤à¥€ पिला सकते हैं।
कैसे है फायदेमंद :
आजवाइन का उपयोग à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत को छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤¨à¥‡ में कारगर साबित हो सकता है। बता दें कि अजवाइन में à¤à¤‚टी पैरासिटिक पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ मौजूद होता है, जो परजीवियों से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की रकà¥à¤·à¤¾ कर सकता है। साथ ही इसमें à¤à¥‚ख को बà¥à¤¾à¤µà¤¾ देने का गà¥à¤£ à¤à¥€ मौजूद होता है (13)। à¤à¤¸à¥‡ में आजवाइन का सेवन कराने से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को परजीवों के कारण होने वाली समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से बचाया जा सकता है। वहीं यह à¤à¥‚ख को बà¥à¤¾à¤µà¤¾ देकर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पोषक आहार खाने के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ à¤à¥€ कर सकती है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत को कम करने में à¤à¥€ मदद मिल सकती है।
4. आम की गà¥à¤ ली का चूरà¥à¤£
सामगà¥à¤°à¥€ :
आधा चमà¥à¤®à¤š आम की गà¥à¤ ली का चूरà¥à¤£
à¤à¤• गिलास गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾ पानी
उपयोग करने का तरीका :
à¤à¤• गिलास गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी में आम की गà¥à¤ ली का चूरà¥à¤£ मिलाकर बचà¥à¤šà¥‡ को पिलाà¤à¤‚।
कैसे है फायदेमंद :
लेख में आपको पहले ही बताया जा चà¥à¤•ा है कि मिटà¥à¤Ÿà¥€ में कई तरह के परजीवी à¤à¥€ मौजूद होते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के पेट में कीड़े होने का जोखिम अधिक रहता है। वहीं इन कीड़ों के कारण बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी à¤à¥€ देखी जा सकती है (14)। à¤à¤¸à¥‡ में आम की गà¥à¤ ली का चूरà¥à¤£ लाà¤à¤•ारी हो सकता है। दरअसल, आम की गà¥à¤ ली से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ शोध से जानकारी मिलती है कि आम की गà¥à¤ ली में à¤à¤‚टी पैरासिटिक (परजीवियों को नषà¥à¤Ÿ करने वाला) पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ मौजूद होता है (15)। यह पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने के कारण होने वाले पेट के कीड़ों को कम करने के साथ ही बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में कीड़ों के कारण होने वाली पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी के जोखिम से à¤à¥€ राहत दिला सकता है। à¤à¤¸à¥‡ आम की गà¥à¤ ली के चूरà¥à¤£ को à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत को छà¥à¥œà¤¾à¤¨à¥‡ का à¤à¤• बेहतर विकलà¥à¤ª माना जा सकता है।
जैसा कि हमने लेख में बताया कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की समसà¥à¤¯à¤¾ सामनà¥à¤¯ है। इसका समाधान आसानी से निकाला जा सकता है। इसके लिठजरूरत है तो बस थोड़ी सी जागरूकता की। इसके अलावा लेख में बताठगठघरेलू उपायों की मदद से à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने से रोका जा सकता है। वहीं इन उपायों को अपनाने के बाद à¤à¥€ बचà¥à¤šà¤¾ अगर इन आदत को नहीं छोड़ता है, तो बिना देर किठडॉकà¥à¤Ÿà¤° से मिलें। आशा करते हैं कि हमारा यह लेख बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में मिटà¥à¤Ÿà¥€ खाने की आदत को छà¥à¥œà¤¾à¤¨à¥‡ और उसके कारण होने वाले जोखिमों को दूर रखने में सहायक साबित होगा। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ से जà¥à¥œà¥€ à¤à¤¸à¥€ ही अनà¥à¤¯ जानकारी हासिल करने के लिठपà¥à¤¤à¥‡ रहें मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨à¥¤
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